शायरी (sad shayri)
ये किस्मत भी यार क्या खूब खेल जाती है, जिनसे दुरिया लिखी हो नसीब में, ये उन के ही करीब ले आती है।। * * * बेपनाह करते थे जो मोहोबत हमसे कभी, वो आज किसी और की पनाह में जा बैठे है। बचाते थे जो हर गैर की नजर से हमें कभी, देखो आज वो ही केसे गैर बने के बैठे है। * * * फिर कभी मुलाकात हो, मेरी तुम्हारी कोई तो बात हो, प्यार ना हो ना ही सही, पर इस अधूरे रिश्ते और वादों का अब , कोई तो अंजाम हो। -divyamodh. (Diya's poetry)