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शायरी (sad shayri)

 ये किस्मत भी यार क्या खूब खेल जाती है, जिनसे दुरिया लिखी हो नसीब में, ये उन के ही करीब ले आती है।।     * * * बेपनाह करते थे  जो   मोहोबत हमसे कभी,     वो  आज किसी और की पनाह में जा  बैठे है।     बचाते थे जो  हर   गैर की  नजर से हमें  कभी,       देखो आज वो ही  केसे गैर बने के बैठे है।          * * * फिर कभी मुलाकात हो, मेरी तुम्हारी कोई तो बात हो, प्यार ना हो ना ही सही,   पर इस अधूरे रिश्ते और  वादों का अब , कोई तो अंजाम हो। -divyamodh. (Diya's poetry)

पुस्तक परिचय.. रश्मिरथी

  पुस्तक नाम: रश्मिरथी लेखक: : रामधारी सिंह दिनकर प्रकाशन:१९५२ आज तक महाभारत को सब ने कृष्णा और पांडव की नजरो से समझा और देखा है। पर रामधारी सिंह दिनकर जी  की लिखी रश्मिरथी एक  ऐसी पुस्तक  जिसे पढ़ने के बाद  शायद आप महाभारत को  एक ओर नजरिए से भी समझ पाएंगे। दिनकर साहब की ये पुस्तक एक खंड काव्य है। जो कर्ण के चरित्र को दर्शाता है। न केवल कर्ण के दान की गाथा बल्कि उसके जीवन  संघर्ष की गाथा का इसमें वर्णन किया गया है। माता कुंती के एक अपराध ने कर्ण के जीवन पर  ऐसा असर डाला की  उसकी इच्छा और  सक्षमता होने के बावजूद भी  उसे अच्छी शिक्षा प्राप्त न हुई । रश्मिरथी न केवल कर्ण के जीवन को दर्शाता है बल्कि उसके  माध्यम से जीवन के कहीं रिश्तों का मूल्य   और अच्छे गुणों का महत्व भी समझाता है। ये  काव्य बताता है कि लोग कितने मतलबी होते है,   मित्र दुर्योधन से लेकर मा कुंती तक सारे लोग महाभारत के युद्ध से डर कर कर्ण के पास आये थे। और सब ने उसे कोई न कोई वचन मांग कर या दान मांग कर उसे युद्ध में कमजोर करने का प्रय...

शायरी..

 वो आयना भी अपनी किस्मत पर क्या खूब इतराता होगा,  जिसे  तू घंटोभर यूहीं निहारा करती होगी।।