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मॉडर्न कौन है??

मॉडर्न  ये शब्द हम कितनी बार बोलते है । मॉडर्न टेक्नोलॉजी, मॉडर्न  कपड़े, मॉडर्न परिवार , मॉडर्न बच्चे, और भी कितनी चीज़े हम इस मॉडर्न शब्द के साथ जोड़ देते है , मगर क्या हम इस शब्द का उपयोग सही से कर रहे है?? मॉडर्न क्या है??   मॉडर्न मतलब जो पहले सहुलते थी वो वैसे रख कर या फिर थोड़ी  सुधारकर उसके साथ नई सहुलते जोड़ी जाय । जैसे कि टीवी , हम आम तौर बोलते है  कि हमने मॉडर्न टीवी लिया या मॉडर्न लैपटॉप खरीदा, तो इन  चीजों में मॉडर्न क्या है?? क्या वो खुद से चालू हो जाते है? खुद से चैनल बदल लेते है?? क्या मॉडर्न लैपटॉप में वर्डपैड एक्सएल का काम भी करता है??नहीं। इन सब चीजों को मॉडर्न इसलिए  कहेते क्योंकि पहले जो सुविधाएं थी इसके अलावा उसमे नई सुविधाएं दी गई। ये तो हुई टेक्नोलॉजी की बात मगर आजकल  एक वाक्य बहुत बोला  जा रहा है  "आज के लड़के लड़कियां  मॉडर्न हो गए है" इसका अर्थ क्या है?? इसका अर्थ है खुले विचारो का होना । अपनी संस्कृति , अपने संस्कारों  को साथ  रखकर आज के दौर के नए विचारों को अपनाना। हमारी अपनी संस्क...

दोस्ती

नहीं रहेना हमे उस महबूब की हथेलियों में , जो अस्क देख कर भी  पिगले ना, ऐ रब तू  रहेने दे हमे उस यार की गलियों में, जिसके होते  अस्क कभी भी निकले ना। दोस्ती .. ये शब्द सुन कर आपको पहले कोनसा नाम याद आता है? पक्का आप सबको अपने  बेस्ट फ्रेंड का नाम याद आ गया होगा, या फिर जय वीरू  शोले फिल्म के धर्मेंद्र और बच्चन साहब  वो याद आए होंगे। जिन्हे हिन्दू धर्म का ज्ञान है उन्हें कृष्न और सुदामा का नाम  जुबान पे आया होगा। एक सच्चा दोस्त जो बस हमारा चहेरा देखकर बता दें की आप  किस मूड में हो,एक  सच्चा दोस्त  जो बिना कुछ जाने भी बता सकता है की हमारी मुस्कान सच्ची है या जूठी। जो बारिश में भी आंसू को पहेचान सकता है, जो हमारे मौन को पढ़ सकता है।   हम छोटे से थे और जब से स्कूल में कदम रखा तब से आज तक हमने कितने दोस्त बनाए,किसी से अपनी नोटबुक शेर कर ली तो वो हमारा दोस्त बं गया, किसी से अपना डब्बा शेर कर लिया तो वो हमारा दोस्त बन गया। एक्जाम में जिस ने मदद कर दी वो हमारा दोस्त। फिर जैसे जैसे बड़े होते गए हम एक ग्रुप में रहेने लगे।  पढ...

पापा.. (father's Day)

पापा ..दो अक्षर का कितना छोटा सा शब्द  है ना? लेकिन ये शब्द जितना छोटा है  उसकी पदवी , उसकी जिम्मेदारियां इतनी ही बड़ी है । पापा,   एक  इंसान जो  हमे जन्म तो नहीं देता लेकिन हमारे जन्म के बाद सारी मिठाईयां , खिलौने वहीं लाता है, पापा , एक इंसान जो हमे स्कूल के लिए सुबह  सुबह उठने  की मेहनत तो नहीं करता लेकिन  हर सुबह सात बजे से  देर रात तक वो काम करता है ताकि हमे  शहेर की अच्छे से अच्छे स्कूल में  भेज सके। पापा  एक इंसान जो शायद हर दोपहर को टिफिन की ठंडी एक दो रोटियां  खाता है ताकि  थोड़ी सी ज्यादा मेहनत कर सके और हमारी एक इच्छा वो ज्यादा पूरी कर सके। पापा, एक इंसान जो बिना किसी लाईफ जैकेट और बिना किसी अवॉर्ड  मिलने की आश अपने परिवार की रक्षा करने हमेशा आगे रहेता है।( आज करोना के दौर में भी पापा अपना काम छोड़कर घर पर नहीं बैठे यही इस बात का सबूत है) पापा , एक इंसान जिसकी  परेशानियां या पैसों की कमी हमेशा तकिये पर आंसू बन   छलकती होगी पर उसकी खुशियां हमेशा परिवार के लिए नए कपड़े  और ज...