दोस्ती

नहीं रहेना हमे उस महबूब की हथेलियों में ,

जो अस्क देख कर भी  पिगले ना,

ऐ रब तू  रहेने दे हमे उस यार की गलियों में,

जिसके होते  अस्क कभी भी निकले ना।


दोस्ती .. ये शब्द सुन कर आपको पहले कोनसा नाम याद आता है? पक्का आप सबको अपने  बेस्ट फ्रेंड का नाम याद आ गया होगा, या फिर जय वीरू  शोले फिल्म के धर्मेंद्र और बच्चन साहब  वो याद आए होंगे। जिन्हे हिन्दू धर्म का ज्ञान है उन्हें कृष्न और सुदामा का नाम  जुबान पे आया होगा।


एक सच्चा दोस्त जो बस हमारा चहेरा देखकर बता दें की आप  किस मूड में हो,एक  सच्चा दोस्त  जो बिना कुछ जाने भी बता सकता है की हमारी मुस्कान सच्ची है या जूठी। जो बारिश में भी आंसू को पहेचान सकता है, जो हमारे मौन को पढ़ सकता है।

  हम छोटे से थे और जब से स्कूल में कदम रखा तब से आज तक हमने कितने दोस्त बनाए,किसी से अपनी नोटबुक शेर कर ली तो वो हमारा दोस्त बं गया, किसी से अपना डब्बा शेर कर लिया तो वो हमारा दोस्त बन गया। एक्जाम में जिस ने मदद कर दी वो हमारा दोस्त। फिर जैसे जैसे बड़े होते गए हम एक ग्रुप में रहेने लगे। 

पढ़ाई ख़तम हुई और जिंदगी को  पैसों की , इस दुनियांमें कुछ बन कर नाम करने की रेस मै उतारना पड़ा, और उसी रेस के चक्कर में  उनमें से कुछ दोस्त   पीछे छूट गए , कुछ  आज भी साथ है, और इस  सोशल मीडिया के युग में तो कई नए  दोस्त   भी बन गए।  पर क्या आपको लगता है की जो दोस्त और दोस्ती  स्कूलमे  या  घर की गलियों में खेल खेल में बनती थी  उससे अच्छी और सच्ची दोस्ती   कभी किसी से बन पाई हो।  

जब हम  छोटे थे तो घर में लाई हर नई चीज के बारे में अपने दोस्तो को बताया कर ते थे, की आज हमारे घर पर नया टी.वी आया , मैने कल आइस्क्रीम खाई , पापा मेरे लिए नई वीडियो गेम लाए और भी कितना कुछ  हम अपने पूरे क्लास के साथ शेर करते थे  । बाद में हम हायर सेकंडरी स्कूल  में आए तो ये सारी बाते  पूरी क्लास की वजह केवल एक इंसान तक सीमित हो गई , वो इंसान जिसे हम अपना बेस्ट फ्रेंड बुलाते है । उस दोस्त से हम सारी बाते हमारा हर सीक्रेट शेर करते है  और फिर कॉलेज में आते आते कभी वो सारे पुराने दोस्त किसी वजह से छूट जाते है और एक नई शुरुआत में नए दोस्त भी बन जाते है । जीवन के इस दौर में तो हम हर छोटी बड़ी बात अपने बेस्ट फ्रेंड से कहे देते है ।

    हर  आलतू फालतू बात के लिए भी हम  उस बेस्ट फ्रेंड को फोन करते है , बे वजह  उसको परेशान करने के लिए रात को नींद से भी उठाते है, और जब वो फोन उठाए तो बस बोल देते है की  बे नींद नहीं आ रही थी बोर हो रहा था , पर पता नहीं क्यों पढ़ाई ख़तम होते ही सारी दुनिया बदल जाती है? 

करियर के चक्कर में कुछ बेस्ट फ्रेंड छूट जाते है,  या फिर उनसे बाते होना कम हो जाता है।फिर बस  सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई फोटो पर लाइक करके या एक दो मसेज करने तक ही दोस्ती रहे जाती है वो भी अगर कोई हमसे कनेक्ट हो तो।

  करियर में हम इतना उलझ जाते है की  जिसे हम कभी सारी बाते बताया करते थे अब उसका हाल पूछने तक की फुरसत नहीं मिलती, और फिर जब दुनिया की रेस से , परिवार की जिम्मेदरी से हार जाते है, थक जाते है तो हम आलकोहल , ड्रग्स जैसी चीजों  की ओर बढ़ जाते है।  ऐसा इसलिए  क्योंकि हमने   अपनी बाते शेर करना बंध कर दिया होता है, हमने अपने जीवन को फेसबुक और बाकी सब सोशल मीडिया के लाइक और कॉमेंट तक ही सीमित कर रखा है।

हा ये मैने सुशांत सिंह राजपूत के केस की वजह से ही  लिखा है, लिखने का हेतु बस इतना है की यार दोस्त पीछे छूट सकते है, भुलाए नहीं जा सकते ,  अगर आपको कभी भी उनकी जरूरत हो तो उनको ढूंढे और कोल करे, फिर देखे आपका सीक्रेट कीपर आपकी आवाज सुन कर ही बता देगा की आप कीस हाल में है

हा यार थोड़ी गालियां तो मिलेगी  पर वो दोस्ती ही क्या जिस में तू तू में में ना हो। 

   हमेशा याद रखे की सच्ची दोस्ती सोने की तरह होती है  उस पर कभी भी जंग  नहीं लगता  , और ये उस कोहिनूर की तरह है जो हर किसी को नसीब नहीं होता।

अगर आपके पास कोहिनूर है तो संभाल कर रखे, उनकी कदर करे।

By : thewriter158

Insta id: મનમોજી_શાયર😍


 



टिप्पणियाँ

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति है आप की‌ ।

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  2. Thank you so much for comment . आशा है कि बाकी सारे ब्लॉग भी आपको इतने ही पसंद आयेंगे।

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