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Amir baap ki beti

 रिंकू बहुत ही अमीर परिवार की बेटी थी। उसके पापा और मम्मी दोनो अपना अलग अलग बिजनेस करते थे।शायद ही कोई ऐसी ऐशो आराम की चीज होगी जो उनके घर में ना हो।  5 गाड़िया, घर के हर रूम में ऐसी, नोकर चाकर सब था रिंकू के पास, वो जो नाश्ता बोलती वो तुरंत बन के हाजिर हो जाता, उसे जहा जाने का मन करता वहा ड्राइवर उसे ले जाता। इतना ही नहीं उसे कभी किसी चीज का हिसाब भी नही देना पड़ता था। दूसरे बच्चो को जहा एक मोबाइल के लिए जिद्द करनी पड़ती वहा, रिंकू के पास मोबाइल, लैपटॉप, आईपेड सब था लेकिन इतना सब मिलने के बावजूद आज उसने घर छोड़ने का फैसला ले लिया था। उसने मम्मी पापा के रूम में एक चिट्ठी लिखी और फिर  मै दोस्त से मिलने जा रही हू शालू आंटी घर मे काम करने वाली शालू को इतना कह कर वो घर से निकल गई। कहानी में आगे क्या हुआ? क्या रिंकू के मम्मी पापा उसे ढूंढ पाए? रिंकू कहा गई? जानने के लिए सुनिए अमीर बाप की बेटी

उम्मीद

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किसी के मन की उदासी को दूर करने के लिए महंगे गिफ्ट की जरूरत नहीं होती कुछ छोटी छोटी बाते है जिसका ख्याल रखकर हम लोगो की उदासी को दूर कर सकते है। क्या है वो बाते सुनिए यू ट्यूब मे diya'spoetry  के  उम्मीद वीडियो में।

सेक्स वर्कर की डायरी Hindi story

 भाग १ मुझे अपने सामने देखते ही उसने कहा "आइए साहब, इस अंधेरी रात में हुस्न के नशे में खोजाइए।" शराब के नशे में डूबा हुआ में रात के घने अंधेरे में मैं उसका चहेरा नही देख पा रहा था। लेकिन शायद उसने मेरा चहेरा देख लिया था। मैं कुछ जवाब देता उससे पहले ही उसने अपनी साड़ी के पल्लू को बदन से ऐसे हटा लिया जैसे वो चाहती हो की में इनकार करने की गलती करने से पहले उसकी खूबसूरती का मुआइना कर लूं। उसकी साड़ी का पल्लू हटते ही नशे में डूबी आँखे खुली की खुली रहे गई। अंधेरे की आड़ में छिपे उसके चहेरे को इग्नोर करते हुए मेरी आँखे उसकी गोरी गर्दन से होते हुए उसके जिस्म के उस हिस्से तक पहुंची जिसका मुआइना करना शायद ही किसी मर्द की आंखे चूक सकती है। मेरी आँखे भी उसी हिस्से का मुआइना करने पहुंच गई थी। डीप नेक के लाल ब्लाउज में से उसके वक्षस्थलो के बीच की जगह पर मेरी आंखे ठहर गई  थी। कुछ क्षण वहा ठहर ने के बाद उसके वक्षस्थलो को देखते हुए आंखे उसकी कमर तक जा पहुंची थी। लेकिन लाल कलर के ब्लाउज में बंद उसके वक्षस्थल के उभार ने मेरी आंखों को फिर अपनी ओर बुला लिया। शराब के नशे के साथ अब उसके हु...

पुस्तक समीक्षा: मुर्दाघर(book review)

  किताब: मुर्दाघर लेखक: साबिर खान पब्लिकेशन:शोपिजियन कीमत:२२१₹ मुर्दाघर लेखक साबिर खान द्वारा लिखी एक किताब मुर्दाघर सस्पेंस और हॉरर से भरपूर कहानी बयाँ करती है।किताब के नाम को देखकर  अनुमान लगाया जा सकता है की किताब की कहानी किसी मुर्दाघर यानी कि स्मशान के आसपास बुनी गई होगी।। लेकिन यही लेखक का खेल है किताब की कहानी मुर्दाघर के आसपास बुनी तो है लेकिन यहाँ मुर्दाघर कोई स्मशान नही बल्की मुर्दाघर नामक एक किताब है । बीरबल नामक एक लेखक जो अपनी हॉरर कहानियों के लिए मशहूर था। उसे अपने रीडर्स को किसी नये तरीके से कहानी कहने के लिए एक असली प्रेतात्मा से अपनी किताब लिखवाने का विचार आया। जिस के बाद अपनी प्रेमिका लावण्या की मदद से वो एक ऐसे तांत्रिक से मिलता है जो पहले एक किसान होता है लेकिन जीवन में घटी दुःखद घटना के कारण वह तांत्रिक बन जाता है। बावला नामक इस तांत्रिक के घर से शुरू होती है एक खौफनाक, रहस्यमय कहानी। एक बिना सिर और सीने पे बड़ी सी आंख वाला बेहद डरावना खबीस जो इस किताब का सूत्रधार बनता है और शुरू करता है एक खूनी खेल। अब वो खबीस कौन है? और बावला किसान से तांत्रिक क्...

शायरी (sad shayri)

 ये किस्मत भी यार क्या खूब खेल जाती है, जिनसे दुरिया लिखी हो नसीब में, ये उन के ही करीब ले आती है।।     * * * बेपनाह करते थे  जो   मोहोबत हमसे कभी,     वो  आज किसी और की पनाह में जा  बैठे है।     बचाते थे जो  हर   गैर की  नजर से हमें  कभी,       देखो आज वो ही  केसे गैर बने के बैठे है।          * * * फिर कभी मुलाकात हो, मेरी तुम्हारी कोई तो बात हो, प्यार ना हो ना ही सही,   पर इस अधूरे रिश्ते और  वादों का अब , कोई तो अंजाम हो। -divyamodh. (Diya's poetry)

पुस्तक परिचय.. रश्मिरथी

  पुस्तक नाम: रश्मिरथी लेखक: : रामधारी सिंह दिनकर प्रकाशन:१९५२ आज तक महाभारत को सब ने कृष्णा और पांडव की नजरो से समझा और देखा है। पर रामधारी सिंह दिनकर जी  की लिखी रश्मिरथी एक  ऐसी पुस्तक  जिसे पढ़ने के बाद  शायद आप महाभारत को  एक ओर नजरिए से भी समझ पाएंगे। दिनकर साहब की ये पुस्तक एक खंड काव्य है। जो कर्ण के चरित्र को दर्शाता है। न केवल कर्ण के दान की गाथा बल्कि उसके जीवन  संघर्ष की गाथा का इसमें वर्णन किया गया है। माता कुंती के एक अपराध ने कर्ण के जीवन पर  ऐसा असर डाला की  उसकी इच्छा और  सक्षमता होने के बावजूद भी  उसे अच्छी शिक्षा प्राप्त न हुई । रश्मिरथी न केवल कर्ण के जीवन को दर्शाता है बल्कि उसके  माध्यम से जीवन के कहीं रिश्तों का मूल्य   और अच्छे गुणों का महत्व भी समझाता है। ये  काव्य बताता है कि लोग कितने मतलबी होते है,   मित्र दुर्योधन से लेकर मा कुंती तक सारे लोग महाभारत के युद्ध से डर कर कर्ण के पास आये थे। और सब ने उसे कोई न कोई वचन मांग कर या दान मांग कर उसे युद्ध में कमजोर करने का प्रय...

शायरी..

 वो आयना भी अपनी किस्मत पर क्या खूब इतराता होगा,  जिसे  तू घंटोभर यूहीं निहारा करती होगी।।