सेक्स वर्कर की डायरी Hindi story
भाग १
मुझे अपने सामने देखते ही उसने कहा "आइए साहब, इस अंधेरी रात में हुस्न के नशे में खोजाइए।"
शराब के नशे में डूबा हुआ में रात के घने अंधेरे में मैं उसका चहेरा नही देख पा रहा था।
लेकिन शायद उसने मेरा चहेरा देख लिया था।
मैं कुछ जवाब देता उससे पहले ही उसने अपनी साड़ी के पल्लू को बदन से ऐसे हटा लिया जैसे वो चाहती हो की में इनकार करने की गलती करने से पहले उसकी खूबसूरती का मुआइना कर लूं।
उसकी साड़ी का पल्लू हटते ही नशे में डूबी आँखे खुली की खुली रहे गई।
अंधेरे की आड़ में छिपे उसके चहेरे को इग्नोर करते हुए मेरी आँखे उसकी गोरी गर्दन से होते हुए उसके जिस्म के उस हिस्से तक पहुंची जिसका मुआइना करना शायद ही किसी मर्द की आंखे चूक सकती है।
मेरी आँखे भी उसी हिस्से का मुआइना करने पहुंच गई थी।
डीप नेक के लाल ब्लाउज में से उसके वक्षस्थलो के बीच की जगह पर मेरी आंखे ठहर गई थी।
कुछ क्षण वहा ठहर ने के बाद उसके वक्षस्थलो को देखते हुए आंखे उसकी कमर तक जा पहुंची थी। लेकिन लाल कलर के ब्लाउज में बंद उसके वक्षस्थल के उभार ने मेरी आंखों को फिर अपनी ओर बुला लिया। शराब के नशे के साथ अब उसके हुस्न का नशा भी मेरी आंखों से होते हुए दिल तक उतर चुका था।
इन खूबसूरत वक्षस्थलों की मालकिन का चहेरा देखने की उत्सुकता में खुद के पैरो को संभालते हुए में उसकी ओर बढ़ा।
उसका चहेरा देखने की लालसा में उसके करीब जाकर मे उसे अपने नजदीक खींच ही रहा था की तभी खुद की ओर बढ़ रहे मेरे हाथो को रोकते हुए उसने कहा क्या साहब यही शुरू होने का इरादा है क्या? थोड़ा सब्र करो।
वो.. मैं अपनी बात खत्म करू उससे पहले ही उसने अपने हाथो को मेरे चहेरे के नजदीक ला कर बहुत ही नजाकत से मेरी आंखों पे पट्टी बांध दी।
मेरा हाथ पकड़ कर चलने लगी।
उसके जिस्म की खूबसूरती में कैद मैं भी उसके पीछे चलने लगा।
अभी हम थोड़े ही आगे चले थे की अंधेरे में किसी पत्थर से मेरा पैर टकराया।
ठोकर लगते ही में उसकी पीठ से टकरा गया।
मेरा स्पर्श होते ही वो शायद थोड़ा मुस्कुराई।
उसकी हल्की हसी मेरे कानो में सुनाई दी।
हल्का सा मुस्कुराने के बाद वो बोली ; "फिक्र न करे जनाब आपका हाथ मेरे हाथो में है अब आप गिरोंगे तो सीधा मेरी बाहों में और कही नही।"
"हाँ, बस शराब की बोतल के टुकड़ों से थोड़ा संभालकर चलिएगा। वो साली हाथो में हो या नीचे इंसान को संभलने नही देती।"
उससे टकराने के बाद में खुद को संभलने की कोशिश कर ही रहा था की उसके इन शब्दों ने मुझे सतर्क कर दिया। उसके इन शब्दों को सुनने के बाद ही मुझे याद आया की मेरे हाथो में एक शराब की बोतल थी।
जो पत्थर से टकराने की वजह से नीचे गिर चुकी थी। मैने खुद को संभाला और उसके पीछे पीछे चलता रहा। उसने अपना एक हाथ लगा कर दरवाजा खोला।
शायद वो दरवाजा लोक नही था।
वो उसका घर था या नहीं पता नही मुझे जानने में दिलचस्पी ही नहीं थी।
उसके नशे में चूर मुझे अब बस उसके चहेरे और उस रूप को देखने की लालसा थी जिसे कुछ देर पहले मैने आधा अधूरा देखा था।
मेरे हाथ उसके जिस्म को छूने के लिए और होंठ उसके रूप का रस पीने के लिए तड़प उठे थे।
This is my first Hindi story if you like this please comment kare or msg me
divyamodh96 (diya'spoetry)
सेक्स वर्कर की डायरी", को प्रतिलिपि पर पढ़ें :,
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें