किताबो से इश्क।।

ये उन दिनों की बात है जब सब को इश्क की हवा लग रही थी, चारो तरफ बस महोब्बत की बाते चल रही थी। सबकी नींद जानू, बाबू, सोना करने में उड़ रही थी। ऐसे में मै कैसे बाकी रहे जाती। मेरी भी नींद उड़ने लगी थी, चेन खोने लगा था। हा मुझ पर भी इश्क का असर होने लगा था। मेरा महेबूब थोड़ा अलग सा था। बाकी सब के महेबुब की तरह वो लोगो में ज्यादा पॉप्यूलर नहीं था।ना तो लोग उसकी बातों में ज्यादा रुचि रखते थे।शुरू शुरू में ना मुझे ये सारी बातें बहुत  चुभती थी, मन करता था की उसे छोड़ दू,  पर फिर कुछ दिनों बाद मैने देखा की बाकी सब के साथी उन पर कुछ न कुछ तरीको से, छोटी बड़ी बंदिशे लगाते थे। और कुछ लोगो की तो जैसे पूरी पसंद नापसंद भी उनके साथी की मर्जी से चलती थी। तब जा के मुझे अपने इश्क पर गर्व हुआ। तब मुझे समझ में आया की मेरा साथी भले ही बाकी सब की तरह  ज्यादा लोगो में पॉप्यूलर नहीं है पर वो अपने साथ रहेने वाले हर इंसान की जिंदगी खूबसूरत बना देता है जैसे उसने अभी मेरी जिंदगी को खूबसूत बनाया है।

हा मेरा साथी मुझे कोई बड़े से फिल्मी वादे नहीं करता, लेकिन वो मेरा हर बड़ा सपना पूरा करने के लिए मुझे बेहद हौसला देता है, मेरे आत्मविश्वास को बढ़ता है। वो मुझे किसी बड़े मॉल से महंगी गिफ्ट नहीं दिलाता, लेकिन मुझे इतना आत्मनिर्भर बनने की शक्ति जरूर देता है  की मै खुद की कमाई से महंगी चीजे खरीद पाऊ। बेशक वो मुझे वेलेंटाईन या जन्मदिन पर कहीं   केन्डलाइट डिनर नहीं करवाता, पर जब भी मैं उसके साथ होती हूं ना तब तब वो मुझे एक शहेर  की, एक नये गाव की, वहा के नये लोगो की,मुलाकात करवाता था। और उन शहेरोमे बसने वाले लोगो की जीवनशैली, उनकी बोली,उनका संघर्ष इन सभी से मेरा परिचय करवाता था।

मेरा साथी ना मुझ पर किसी रित रिवाजों की बंदिशे नहीं लगता था, उल्टा वो तो मुझे उन बंदिशों से आजाद हो कर  अपनी ज़िन्दगी अपने तरीके से जीना सिखाता था। हा कभी कभी वो मुझे संस्कारो की समझ भी दे जाता था। कभी जीवन की और समाज की कड़वी हकीकत बताकर रुला देता था, तो कभी कोई मज़ेदार किस्सा सुनकर हसा भी देता था। वो ज्ञान का वो भंडार है जो जिसके भी पास होगा वो इंसान कभी भी  हारेगा नहीं। हा उससे इश्क होना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन अगर एकबार हो जाए तो फिर उसके बिना रहे पाना भी मुश्किल है।

चलो अब आखिर में आपको उस साथी का नाम बताती हूं जिससे मुझे इश्क हुआ ...  " मेरी किताबें"। हा यही था मेरा साथी , मेरा इश्क जो आज भी मेरे साथ है।।

-thewriter158 divyamodh

Insta. Divyamodh96 (diya's poetry)

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