किताबो से इश्क।।
ये उन दिनों की बात है जब सब को इश्क की हवा लग रही थी, चारो तरफ बस महोब्बत की बाते चल रही थी। सबकी नींद जानू, बाबू, सोना करने में उड़ रही थी। ऐसे में मै कैसे बाकी रहे जाती। मेरी भी नींद उड़ने लगी थी, चेन खोने लगा था। हा मुझ पर भी इश्क का असर होने लगा था। मेरा महेबूब थोड़ा अलग सा था। बाकी सब के महेबुब की तरह वो लोगो में ज्यादा पॉप्यूलर नहीं था।ना तो लोग उसकी बातों में ज्यादा रुचि रखते थे।शुरू शुरू में ना मुझे ये सारी बातें बहुत चुभती थी, मन करता था की उसे छोड़ दू, पर फिर कुछ दिनों बाद मैने देखा की बाकी सब के साथी उन पर कुछ न कुछ तरीको से, छोटी बड़ी बंदिशे लगाते थे। और कुछ लोगो की तो जैसे पूरी पसंद नापसंद भी उनके साथी की मर्जी से चलती थी। तब जा के मुझे अपने इश्क पर गर्व हुआ। तब मुझे समझ में आया की मेरा साथी भले ही बाकी सब की तरह ज्यादा लोगो में पॉप्यूलर नहीं है पर वो अपने साथ रहेने वाले हर इंसान की जिंदगी खूबसूरत बना देता है जैसे उसने अभी मेरी जिंदगी को खूबसूत बनाया है। हा मेरा साथी मुझे कोई बड़े से फिल्मी वादे नहीं करता, लेकिन वो मेरा हर बड़ा सपना पूरा करने के ...