पापा.. (father's Day)

पापा ..दो अक्षर का कितना छोटा सा शब्द  है ना? लेकिन ये शब्द जितना छोटा है  उसकी पदवी , उसकी जिम्मेदारियां इतनी ही बड़ी है ।

पापा,   एक  इंसान जो  हमे जन्म तो नहीं देता लेकिन हमारे जन्म के बाद सारी मिठाईयां , खिलौने वहीं लाता है,

पापा , एक इंसान जो हमे स्कूल के लिए सुबह  सुबह उठने  की मेहनत तो नहीं करता लेकिन  हर सुबह सात बजे से  देर रात तक वो काम करता है ताकि हमे  शहेर की अच्छे से अच्छे स्कूल में  भेज सके।

पापा  एक इंसान जो शायद हर दोपहर को टिफिन की ठंडी एक दो रोटियां  खाता है ताकि  थोड़ी सी ज्यादा मेहनत कर सके और हमारी एक इच्छा वो ज्यादा पूरी कर सके।

पापा, एक इंसान जो बिना किसी लाईफ जैकेट और बिना किसी अवॉर्ड  मिलने की आश अपने परिवार की रक्षा करने हमेशा आगे रहेता है।( आज करोना के दौर में भी पापा अपना काम छोड़कर घर पर नहीं बैठे यही इस बात का सबूत है)

पापा , एक इंसान जिसकी  परेशानियां या पैसों की कमी हमेशा तकिये पर आंसू बन   छलकती होगी पर उसकी खुशियां हमेशा परिवार के लिए नए कपड़े  और जरूरत की चीजें  लाने में छलकती है।

पापा,  हमारे शरीर की रीढ़ की हड्डी की तरह है दोस्तो , वो उस नीम के पेड़ जैसे है जो कड़वा होता है पर हम कड़ी धूप से भी वहीं बचाता है।

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